Pages

Saturday, September 5, 2026

फाइनली बागियों की सांसदी रद्द करने पर मजबूर हुए स्पीकर बिरला! SC को नहीं दे पाए झांसा, CJI ने धज्जियां उड़ाईं! शाह को बचाने में फंसे बिरला..पलटा गेम ##OmBirla #SupremeCourt #TMC #BJP #CJISuryaKant #AntiDefectionLaw #TrinamoolCongress #NCPI #AbhishekBanerjee #MahuaMoitra #WestBengalPolitics #LokSabha #BreakingNews #IndianPolitics #DainikBhaskar #PoliticalCrisis #Defection #NDA #MamataBanerjee #SpeakerBirla# india today news#

 


Meta Description: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने TMC के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर 22 सितंबर तक जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद स्पीकर को कार्रवाई करनी पड़ी। जानिए पूरा मामला और राजनीतिक गणित।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद बिरला ने बदली चाल

राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को आखिरकार TMC के 20 बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और CJI सूर्यकांत की बेंच के सवालों के बाद स्पीकर ने बागियों को नोटिस जारी कर 22 सितंबर तक जवाब देने का समय दिया है । लेकिन क्या यह महज एक दिखावा है? आइए इस पूरे मामले की पड़ताल करते हैं।

क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल में TMC की हार के बाद 14 जून को TMC के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी और नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए । इन सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया। TMC ने इसे दल-बदल मानते हुए 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत इन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की

अभिषेक बनर्जी ने उठाई आवाज़

TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 18 जून को स्पीकर ओम बिरला को अलग-अलग याचिकाएं सौंपी और इन बागी सांसदों को अयोग्य करार देने की मांग की । इसके बाद 27 जुलाई और 12 अगस्त को भी बनर्जी ने स्पीकर से मुलाकात की और कार्रवाई की गुहार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने खोली पोल

जब स्पीकर की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अभिषेक बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे । CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 25 अगस्त को इस याचिका पर सुनवाई की

क्या बोली सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अहम सवाल यह नहीं है कि नोटिस जारी हुआ या नहीं, बल्कि कार्यवाही को समय पर पूरा करना है । कोर्ट ने कहा कि स्पीकर को दल-बदल विरोधी कानून के तहत दायर याचिकाओं पर समयबद्ध फैसला करना चाहिए

सॉलिसिटर जनरल ने कैसे बचाया बिरला को?

सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने स्पीकर को नोटिस जारी करने की बात कही तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बीच-बचाव किया। उन्होंने कहा कि वे स्पीकर की ओर से पेश होंगे और बताया कि स्पीकर ने पहले ही नोटिस जारी कर दिए हैं । CJI सूर्यकांत और जस्टिस बागची ने कहा कि वे किसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ कोई आदेश नहीं देना चाहते, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसे फैसले समय सीमा में हों

बिरला ने बागियों को क्यों दिया 21 दिन?

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद स्पीकर ओम बिरला ने 25 अगस्त को 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया । लेकिन अजीब बात यह है कि जब नोटिस में 7 दिन का समय दिया गया था, तब बागी सांसदों ने अतिरिक्त समय मांगा और स्पीकर ने उन्हें 22 सितंबर तक का समय दे दिया । यानी बागियों को जवाब देने के लिए पूरे 21 दिन का समय मिल गया

क्या है BJP का गणित?

बागी सांसदों के पास TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 का समर्थन है, यानी 71.4% । दल-बदल कानून के पैराग्राफ 4 के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं तो वे अयोग्यता से बच सकते हैं । यहीं से BJP और इन बागियों की चाल चली।

क्या है असली विवाद?

TMC का कहना है कि "मूल राजनीतिक दल" का विलय होना चाहिए, न कि केवल विधायी दल का । TMC ने 2023 के शिवसेना मामले (महाराष्ट्र राजनीतिक संकट) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है, जहां कोर्ट ने मूल राजनीतिक दल और विधायी दल के बीच स्पष्ट अंतर किया था

बागी सांसदों ने क्यों चुना NCPI?

बागी सांसद सीधे BJP में विलय नहीं कर सकते थे क्योंकि यह दल-बदल के खिलाफ है । इसलिए उन्होंने NCPI (तृपुरा-आधारित पार्टी) को चुना, जो NDA की सहयोगी है । इसके बाद उन्होंने NDA को समर्थन देने का ऐलान कर दिया

महुआ मोइत्रा ने क्या कहा?

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों को 21 दिन का समय देना चाल है ताकि 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल अधिक समय मांग सकें । मोइत्रा ने इसे "BJP + NCP = बड़े झूठे" करार दिया

क्या है इस मामले की अहमियत?

यह मामला सिर्फ TMC के बागी सांसदों तक सीमित नहीं है। यह पूरे दल-बदल कानून, स्पीकर की संवैधानिक भूमिका और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की परीक्षा है । अगर सुप्रीम कोर्ट स्पीकर को कार्रवाई के लिए मजबूर कर सकता है, तो यह भविष्य के ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल बनेगा।

क्या होगा आगे?

💥22 सितंबर तक बागी सांसदों को जवाब देना है

💥18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई है

💥स्पीकर  फैसला तय करेगा कि 20 सांसद अयोग्य होते हैं या नहीं

💥अगर स्पीकर बागियों के पक्ष में फैसला देते हैं तो TMC को बड़ा झटका लगेगा

निष्कर्ष

स्पीकर ओम बिरला सुप्रीम कोर्ट को झांसा नहीं दे पाए और उन्हें बागियों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी । हालांकि, बागियों को 21 दिन का समय देकर BJP और बिरला ने एक नई चाल चली है । अब देखना यह है कि 22 सितंबर के बाद सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है और क्या बागी सांसदों की सांसदी बच पाती है या नहीं। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने बिरला की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और यह मामला देश की राजनीति का सबसे गरमागरम मुद्दा बना हुआ है।

No comments:

Post a Comment